सूरः अल् फुरकान-25

आयत नं. 52:- फला तुतिअल काफिरन व जाहिद्हुम् बिही जिहादन कबीरा।(52)

आयत नं. 52:- तो (ऐ पैगम्बर) तुम काफिरों का कहा न मानना और इस (कुरआन की दलीलों) से उनका सामना बड़े जोर से करना।(52)

कुरआन शरीफ से आयत नं. 53 से 59 का हिन्दी अनुवाद निम्न है:-

आयत नं. 53:- और वही है जिसने दो दरियाओं को मिला (मिला) चलाया। एक (का पानी) मीठा प्यास बुझाने वाला और एक (का) खारी कड़वा और दोनों में एक मजबूत रोक बना दी।

आयत नं. 54:- और वही है जिसने पानी (की बूँद) से आदमी को पैदा किया। फिर उसे साहिबे नसब (यानि किसी का बेटा या बेटी) और ससुराल वाला (यानि किसी का दामाद, बहू) बनाया। और तुम्हारा परवरदिगार हर चीज करने पर शक्तिमान है।

आयत नं. 55:- और (काफिर) अल्लाह के सिवाय ऐसों को पूजते हैं जो न उनको नफा पहुँचा सकते हैं और न (उनको) नुकसान (पहुँचा सकते हैं) और काफिर तो अपने परवरदिगार से पीठ दिए हुए (मुँह मोड़े) हैं।

आयत नं. 56:- और (ऐ पैगम्बर) हमने तुमको खुशखबरी सुनाने और (सिर्फ अजाब से) डराने के लिए भेजा है।

आयत नं. 57:- (इन लोगों से) कहो कि मैं तुमसे इस (अल्लाह के हुक्म) पर कुछ मजदूरी नहीं माँगता। हाँ, जो चाहे अपने परवरदिगार तक पहुँचने की राह इख्तियार कर ले।

आयत नं. 58:- और (ऐ पैगम्बर) उस जिंदा (चैतन्य) पर भरोसा रखो जो कभी मरने वाला नहीं और तरीफ के साथ उसकी पाकी ब्यान करते रहो और अपने बंदों के गुनाहों से वह काफी खबरदार है।

{अरबी भाषा वाला मूल पाठ ’’नागरी लिपि में‘‘ आयत नं. 58:-

व तवक्कल अल्ल् हय्यिल्लजी ला यमूतु व सब्बिह् बिहम्दिह व कफा बिही बिजुनूबि अिबादिह खबीरा।

आयत नं. 59:- जिसने आसमानों और जमीन और जो कुछ उनके बीच में है (सबको) छः दिन में पैदा किया और फिर तख्त पर जा बिराजा। (वह अल्लाह बड़ा) रहमान है तो उसकी खबर किसी बाखबर (इल्मवाले) से पूछ देखो।

आयत नं. 58:- और (ऐ पैगम्बर) उस जिंदा {जो जिंदा बाबा के वेश में तेरे को काबा में मिला था, वह अल्लाह कबीर} पर विश्वास रखो जो कभी मरने वाला नहीं है (अविनाशी परमेश्वर है) और तारीफ (प्रशंसा) के साथ उसकी पाकी ब्यान (पवित्र महिमा का गुणगान) करते रहो और अपने बंदों के गुनाहों (पापों) से वह कबीर परमेश्वर अच्छी तरह परिचित है यानि सत्य साधक के सब पाप नाश कर देता है।

वह ज्ञान जिसको कुरआन तथा गीता ज्ञान उतारने वाला भी नहीं जानता

आयत 59:- कबीर अल्लाह (अल्लाहू अकबर) वही है जिसने सर्व सृष्टि (ऊपर वाली तथा पृथ्वी वाली) की रचना छः दिन में की। फिर ऊपर अपने निज लोक में सिंहासन पर जा विराजा। (बैठ गया।) वह कबीर अल्लाह बहुत रहमान (दयावान) है। उसके विषय में पूर्ण जानकारी किसी (बाखबर) तत्त्वदर्शी संत से पूछो, उससे जानो।