अध्याय 6 श्लोक 29

सर्वभूतस्थम्, आत्मानम्, सर्वभूतानि, च, आत्मनि,
ईक्षते, योगयुक्तात्मा, सर्वत्र, समदर्शनः ।।29।।

अनुवाद: (योगयुक्तात्मा) भक्तियुक्त आत्मावाला (सर्वत्र) सबमें (समदर्शनः) समभावसे देखनेवाला (आत्मानम्) पूर्ण परमात्मा जो आत्मा के साथ अभेद रूप में है उसको (सर्वभूतस्थम्) सम्पूर्ण प्राणियों में स्थित (च) और (सर्वभूतानि) सम्पूर्ण प्राणियों को (आत्मनि) अपने समान अर्थात् जैसा दुःख व सुख अपने होता है इस दृष्टिकोण से(ईक्षते) देखता है। (29)

हिन्दी: भक्तियुक्त आत्मावाला सबमें समभावसे देखनेवाला पूर्ण परमात्मा जो आत्मा के साथ अभेद रूप में है उसको सम्पूर्ण प्राणियों में स्थित और सम्पूर्ण प्राणियों को अपने समान अर्थात् जैसा दुःख व सुख अपने होता है इस दृष्टिकोण से देखता है।

(श्लोक नं 30-31 में अपनी भक्ति वाले साधक की स्थिति बताई है)