क्या ईश्वर साकार है या निराकार?

बाइबिल के आधार पर ईश्वर के साकार स्वरूप का शास्त्रीय परीक्षण

भूमिका

आधुनिक ईसाई और यहूदी धर्मशास्त्र में प्रायः यह कहा जाता है कि ईश्वर निराकार, देहहीन और अमूर्त है। किंतु यदि बाइबिल को उसके मूल पाठ के अनुसार, बिना बाद की दार्शनिक व्याख्याओं के पढ़ा जाए, तो एक बिल्कुल भिन्न चित्र सामने आता है। उत्पत्ति (Genesis) से लेकर निर्गमन (Exodus) और आगे तक, बाइबिल बार-बार ईश्वर को दिखाई देने वाला, चलने वाला, बोलने वाला, खाने वाला, बैठने वाला, ऊपर-नीचे आने वाला और मनुष्यों से प्रत्यक्ष रूप से संवाद करने वाला बताती है।

यह लेख बाइबिल के प्रमुख पदों के आधार पर यह सिद्ध करता है कि बाइबिल का ईश्वर निराकार नहीं, बल्कि साकार (corporeal) है।


1. ईश्वर की छवि में मनुष्य की रचना: स्वरूप के बिना छवि संभव नहीं

उत्पत्ति 1:26–27

“आओ, हम मनुष्य को अपने स्वरूप में, अपनी समानता के अनुसार बनाएं…” “और परमेश्वर ने मनुष्य को अपने ही स्वरूप में बनाया; नर और नारी करके बनाया।”

यहाँ प्रयुक्त शब्द छवि और समानता केवल नैतिक गुणों की ओर संकेत नहीं करते, बल्कि रूप-समानता का भाव प्रकट करते हैं। विशेष ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि:

  • ईश्वर की एक छवि है
  • मनुष्य उसी छवि में बनाया गया
  • वह छवि नर और नारी के रूप में प्रकट हुई

यदि ईश्वर पूर्णतः निराकार होता, तो “छवि” और “समानता” जैसे शब्द अर्थहीन हो जाते। यह पद स्पष्ट रूप से साकार स्वरूप की ओर संकेत करता है


2. अदन की वाटिका में ईश्वर का आना और चलना

उत्पत्ति 3:8–10

“और उन्होंने यहोवा परमेश्वर की आहट सुनी, जो दिन की ठंडी बेला में वाटिका में टहल रहा था…” “तब आदम और उसकी पत्नी यहोवा परमेश्वर के सामने से वृक्षों के बीच छिप गए।” “और यहोवा परमेश्वर ने आदम को बुलाकर कहा, तू कहाँ है?”

यहाँ ईश्वर को:

  • चलते हुए बताया गया है
  • उसकी आहट सुनी जाती है
  • वह एक विशिष्ट स्थान (वाटिका) में उपस्थित है
  • मनुष्य उससे छिपते हैं

परंतु इस प्रसंग का सबसे निर्णायक बिंदु अगला पद है।

उत्पत्ति 3:10

“मैंने वाटिका में तेरी आहट सुनी, और मैं डर गया, क्योंकि मैं नंगा था; इसलिए मैं छिप गया।”

आदम और हव्वा नग्न होने के कारण छिपते हैं। यह अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य है। नग्नता केवल तभी अर्थपूर्ण होती है जब सामने वाला:

  • देख सकता हो
  • साकार उपस्थिति रखता हो

कोई निराकार, अदृश्य सत्ता से कोई व्यक्ति अपने शारीरिक नग्नपन को नहीं छिपाता। यह प्रसंग स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि ईश्वर की उपस्थिति देहधारी और दृश्य थी।


3. ईश्वर का भौतिक कार्य करना

उत्पत्ति 3:21

“यहोवा परमेश्वर ने आदम और उसकी पत्नी के लिए चमड़े के कपड़े बनाए और उन्हें पहनाए।”

यहाँ ईश्वर:

  • सामग्री (चमड़ा) का प्रयोग करता है
  • वस्त्र बनाता है
  • मनुष्यों को पहनाता है

ये सभी भौतिक क्रियाएं हैं, जो केवल साकार सत्ता द्वारा ही की जा सकती हैं।


4. ईश्वर का प्रकट होना

उत्पत्ति 12:7

“यहोवा अब्राम को दिखाई दिया…”

उत्पत्ति 17:1

“यहोवा अब्राम को दिखाई दिया और उससे कहा…”

“दिखाई देना” तभी संभव है जब कोई रूप हो। निराकार सत्ता का “दिखना” बाइबिल के शब्दों में कहीं स्पष्ट नहीं किया गया।


5. अब्राहम के यहाँ ईश्वर का अतिथि रूप में आना

उत्पत्ति 18:1–2

“यहोवा मम्रे के बांज वृक्षों के पास अब्राहम को दिखाई दिया… और उसने देखा कि तीन पुरुष उसके सामने खड़े हैं।”

उत्पत्ति 18:4–5

“थोड़ा पानी लाया जाए, और आप अपने पाँव धो लें…” “मैं थोड़ा भोजन लाता हूँ, जिससे आप तृप्त हों।”

उत्पत्ति 18:8

“और उन्होंने खाया।”

यह प्रसंग अत्यंत स्पष्ट है:

  • ईश्वर पुरुषों के रूप में प्रकट होता है
  • उसके पाँव हैं
  • पाँव धोए जाते हैं
  • वह भोजन करता है
  • वह वृक्ष के नीचे विश्राम करता है

यह न तो स्वप्न है, न दर्शन, न प्रतीक—बल्कि प्रत्यक्ष भौतिक भेंट है।


6. ईश्वर का ऊपर-नीचे आना जाना

उत्पत्ति 11:5

“यहोवा नगर और मीनार को देखने के लिए नीचे उतरा।”

उत्पत्ति 17:22

“और परमेश्वर अब्राहम के पास से ऊपर चला गया।”

नीचे उतरना और ऊपर जाना:

  • दिशा
  • स्थान
  • गति का बोध कराता है, जो केवल साकार सत्ता में संभव है।

7. ईश्वर का मुख, हाथ और पीठ

निर्गमन 33:11

“यहोवा मूसा से आमने-सामने बातें करता था, जैसे कोई मनुष्य अपने मित्र से करता है।”

निर्गमन 33:20–23

“तू मेरा मुख नहीं देख सकता…” “मैं तुझे अपने हाथ से ढाँप लूँगा…” “तू मेरी पीठ देखेगा…”

मुख, हाथ और पीठ—ये सभी देह के अंग हैं। यह स्वयं ईश्वर के कथन हैं, न कि कवि की कल्पना।


8. ईश्वर का देखा जाना, खड़ा होना और बैठना

निर्गमन 24:9–10

“उन्होंने इस्राएल के परमेश्वर को देखा… और उसके पाँवों के नीचे नीलम के समान फर्श था।”

यशायाह 6:1

“मैंने प्रभु को सिंहासन पर बैठे देखा।”

बैठना, खड़ा होना और पाँवों का वर्णन—ये सभी साकारता सिद्ध करते हैं।


9. ईश्वर का सूँघना और भोजन करना

उत्पत्ति 8:21

“यहोवा ने सुगंधित गंध सूँघी…”

निर्गमन 24:11

“उन्होंने परमेश्वर को देखा, और खाया-पिया।”

सूँघना और खाना इंद्रियजन्य क्रियाएं हैं।


10. ईश्वर की आकृति (Similitude)

गिनती 12:8

“वह यहोवा की आकृति को देखता है।”

अय्यूब 19:26

“मैं अपने शरीर में परमेश्वर को देखूँगा।”

बाइबिल स्वयं स्वीकार करती है कि ईश्वर की आकृति है।


11. “किसी ने परमेश्वर को नहीं देखा” — स्पष्टीकरण

यूहन्ना 1:18

“किसी मनुष्य ने परमेश्वर को कभी नहीं देखा…”

यह कथन ईश्वर के पूर्ण स्वरूप को देखने की बात करता है, न कि आंशिक या नियंत्रित दर्शन की। निर्गमन 33 में यही भेद स्पष्ट किया गया है।


निष्कर्ष: बाइबिल का ईश्वर साकार है

समग्र बाइबिल अध्ययन से स्पष्ट होता है कि ईश्वर:

  • चलता है
  • दिखाई देता है
  • आमने-सामने बात करता है
  • भोजन करता है
  • पाँव, हाथ, मुख और पीठ रखता है
  • जिससे मनुष्य अपनी नग्नता छिपाते हैं

निराकार ईश्वर की धारणा बाइबिल से नहीं, बल्कि बाद की दार्शनिक व्याख्याओं से आई है। बाइबिल का ईश्वर साकार, व्यक्तिगत और प्रत्यक्ष है।

अतः बाइबिल के अनुसार ईश्वर निराकार नहीं, बल्कि साकार है।