अध्याय 10 श्लोक 1

(भगवान उवाच)

भूयः, एव, महाबाहो, श्रृृणु, मे, परमम्, वचः,
यत्, ते, अहम्, प्रीयमाणाय, वक्ष्यामि, हितकाम्यया ।।1।।

अनुवाद: (महाबाहो) हे महाबाहो! (भूयः) फिर (एव) भी (मे) मेरे (परमम्) परम रहस्य और प्रभावयुक्त (वचः) वचनको (श्रृणु) सुन (यत्) जिसे (अहम्) मैं (ते) तुझ (प्रीयमाणाय) अतिशय प्रेम रखनेवालेके लिये (हितकाम्यया) हितकी इच्छासे (वक्ष्यामि) कहूँगा। (1)

हिन्दी: हे महाबाहो! फिर भी मेरे परम रहस्य और प्रभावयुक्त वचनको सुन जिसे मैं तुझ अतिशय प्रेम रखनेवालेके लिये हितकी इच्छासे कहूँगा।