अध्याय 14 श्लोक 18
ऊध्र्वम्, गच्छन्ति, सत्त्वस्थाः, मध्ये, तिष्ठन्ति, राजसाः,
जघन्यगुणवृृत्तिस्थाः, अधः, गच्छन्ति, तामसाः ।।18।।
अनुवाद: (सत्त्वस्थाः) सत्वगुणमें स्थित पुरुष अर्थात् विष्णु उपासक (ऊध्र्वम्) ऊपर वाले स्वर्गादि लोकोंको (गच्छन्ति) जाते हैं रजोगुणमें स्थित (राजसाः) राजस पुरुष अर्थात् ब्रह्मा उपासक (मध्ये) मध्य वाले पृथ्वी लोक में अर्थात् मनुष्यलोकमें ही (तिष्ठन्ति) रहते हैं और (जघन्यगुणवृत्तिस्थाः) तमोगुणके कार्यरूप निद्रा, प्रमाद और आलस्यादिमें स्थित (तामसाः) तामस पुरुष अर्थात् शिव उपासक (अधः) नीचे वाले पताल अर्थात् नरकों तथा अधोगति अर्थात् कीट, पशु आदि नीच योनियों को (गच्छन्ति) प्राप्त होते हैं। उदाहरण - रावण, भष्मासुर आदि। (18)
हिन्दी: सत्वगुणमें स्थित पुरुष अर्थात् विष्णु उपासक ऊपर वाले स्वर्गादि लोकोंको जाते हैं रजोगुणमें स्थित राजस पुरुष अर्थात् ब्रह्मा उपासक मध्य वाले पृथ्वी लोक में अर्थात् मनुष्यलोकमें ही रहते हैं और तमोगुणके कार्यरूप निद्रा, प्रमाद और आलस्यादिमें स्थित तामस पुरुष अर्थात् शिव उपासक नीचे वाले पताल अर्थात् नरकों तथा अधोगति अर्थात् कीट, पशु आदि नीच योनियों को प्राप्त होते हैं। उदाहरण - रावण, भष्मासुर आदि।