भगवान शिव नाशवान हैं
देवी भागवत पुराण के अनुसार भगवान शिव का जन्म और नश्वर स्वरूप
हिंदू धर्मग्रंथों में प्रचलित सामान्य धारणा के विपरीत, कुछ पुराण स्पष्ट रूप से यह बताते हैं कि ब्रह्मा, विष्णु और शिव — तीनों ही जन्म-मरण के चक्र में बंधे हुए हैं और इनके माता-पिता भी हैं। श्रीमद् देवी भागवत पुराण (गीता प्रेस, गोरखपुर से प्रकाशित) इस विषय में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत करता है।
देवी भागवत पुराण स्कन्ध 3 अध्याय 4-5 का प्रमाण
देवी भागवत पुराण के तीसरे स्कन्ध के अध्याय 4-5 में स्वयं श्री विष्णु माता दुर्गा की स्तुति करते हुए कहते हैं कि—
हे मातः! आप शुद्ध स्वरूपा हो, सारा संसार आप से ही उद्भाषित हो रहा है, हम आपकी कृपा से विद्यमान हैं, मैं, ब्रह्मा और शंकर तो जन्मते-मरते हैं, हमारा तो अविर्भाव (जन्म) तथा तिरोभाव (मृत्यु) हुआ करता है, हम अविनाशी नहीं हैं। तुम ही जगत जननी और सनातनी देवी हो और प्रकृति देवी हो।
शंकर भगवान बोले, हे माता! विष्णु के बाद उत्पन्न होने वाला ब्रह्मा जब आपका पुत्र है तो क्या मैं तमोगुणी लीला करने वाला शंकर तुम्हारी सन्तान नहीं हुआ अर्थात् मुझे भी उत्पन्न करने वाली तुम ही हो।
देवी भागवत पुराण (गीता प्रेस, गोरखपुर)

भगवान शिव का स्वयं का कथन
इसी अध्याय में भगवान शिव स्वयं माता दुर्गा से प्रश्न करते हैं कि—
जब विष्णु के बाद उत्पन्न होने वाले ब्रह्मा आपके पुत्र हैं, तो क्या मैं तमोगुणी लीला करने वाला शंकर आपकी संतान नहीं हूं? अर्थात मुझे उत्पन्न करने वाली भी आप ही हैं।
यह कथन अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें स्वयं शिव स्वीकार करते हैं कि उनका जन्म माता दुर्गा से हुआ है।
निष्कर्ष
देवी भागवत पुराण के इस प्रमाण से यह स्पष्ट सिद्ध होता है कि—
- श्री ब्रह्मा, श्री विष्णु और श्री शिव तीनों के माता दुर्गा देवी हैं
- तीनों देवता जन्म और मृत्यु के अधीन हैं
- वे अविनाशी या सर्वशक्तिमान परमेश्वर नहीं हैं
- माता दुर्गा प्रकृति देवी हैं और सृष्टि की जननी हैं
अतः देवी भागवत पुराण के अनुसार भगवान शिव कोई स्वयंभू या शाश्वत परमेश्वर नहीं हैं बल्कि प्रकृति देवी दुर्गा से उत्पन्न एक महान देवता हैं, जो सृष्टि संचालन में अपनी-अपनी भूमिका निभाते हैं।