अध्याय 5 श्लोक 26
कामक्रोधवियुक्तानाम्, यतीनाम्, यतचेतसाम्,
अभितः, ब्रह्मनिर्वाणम्, वर्तते, विदितात्मनाम् ।।26।।
अनुवाद: (कामक्रोधवियुक्तानाम्) काम-क्रोधसे रहित (यतचेतसाम्) प्रभु भक्ति में प्रयत्न शील (विदितात्मनाम्) परमात्माका साक्षात्कार किये हुए (यतीनाम्) परमात्मा आश्रित पुरुषोंके लिये (अभितः) सब ओरसे (ब्रह्मनिर्वाणम्) शान्त ब्रह्म को अर्थात् पूर्णब्रह्म परमात्मा को ही (वर्तते) व्यवहार में लाते हैं अर्थात् केवल एक पूर्ण प्रभु की ही पूजा करते हैं। (26)
हिन्दी: काम-क्रोधसे रहित प्रभु भक्ति में प्रयत्न शील परमात्माका साक्षात्कार किये हुए परमात्मा आश्रित पुरुषोंके लिये सब ओरसे शान्त ब्रह्म को अर्थात् पूर्णब्रह्म परमात्मा को ही व्यवहार में लाते हैं अर्थात् केवल एक पूर्ण प्रभु की ही पूजा करते हैं।
विशेष - गीता अध्याय 5 श्लोक 27 व 28 में विवरण है कि जो साधक पूर्ण संत अर्थात् तत्वदर्शी संत से उपदेश प्राप्त कर लेता है फिर स्वांस-उस्वांस से सामान्य रूप से सुमरण करता है वही विकार रहित होकर पूर्ण परमात्मा को प्राप्त करके अनादि मोक्ष प्राप्त करता है।