अध्याय 13 का श्लोक 23
यः, एवम्, वेत्ति, पुरुषम्, प्रकृृतिम्, च, गुणैः, सह,
सर्वथा, वर्तमानः, अपि, न, सः, भूयः, अभिजायते ।।23।।
अनुवाद: (एवम्) इस प्रकार (पुरुषम्) सतपुरुषको (च) और (गुणैः) गुणों अर्थात् रजगुण ब्रह्म, सतगुण विष्णु तथा तमगुण शिव जी के (सह) सहित (प्रकृतिम्) माया अर्थात् दुर्गा को (यः) जो (वेत्ति) तत्त्वसे जानता है (सः) वह (सर्वथा) सब प्रकारसे (वर्तमानः) वर्तमान में शास्त्र विरुद्ध भक्ति साधना से मुड़ जाता है अर्थात् शास्त्र विधि अनुसार भक्ति कर्मों को वर्तमान में ही करता हुआ (अपि) भी (भूयः) फिर (न) नहीं (अभिजायते) जन्मता। (23)
हिन्दी: इस प्रकार सतपुरुषको और गुणों अर्थात् रजगुण ब्रह्म, सतगुण विष्णु तथा तमगुण शिव जी के सहित माया अर्थात् दुर्गा को जो तत्त्वसे जानता है वह सब प्रकारसे वर्तमान में शास्त्र विरुद्ध भक्ति साधना से मुड़ जाता है अर्थात् शास्त्र विधि अनुसार भक्ति कर्मों को वर्तमान में ही करता हुआ भी फिर नहीं जन्मता।