सूरः अल् अंबिया-21
कुरआन का ज्ञान देने वाला अपनी महिमा बताता है
आयत नं. 92:- यह है तुम्हारा तरीका कि (जिस पर तुमको रहना वाजिब है और) वह एक ही तरीका है और मैं तुम्हारा रब हूँ सो तुम मेरी इबादत किया करो।
आयत नं. 30:- उन काफिरों को यह मालूम नहीं हुआ कि आसमान और जमीन (पहले) बंद थे। फिर हमने दोनों को (अपनी कुदरत से) खोल दिया। और हमने पानी से हर जानदार चीज को बनाया। क्या (उन बातों को सुनकर) फिर भी ईमान नहीं लाते।
आयत नं. 31:- और हमने जमीन में इसलिए पहाड़ बनाए कि जमीन उन लोगों को लेकर हिलने न लगे। और हमने इस जमीन में खुले रास्ते बनाए ताकि वे लोग (उनके जरिये से) मंजिलों (मकसूद) को पहुँच जाएँ।
आयत नं. 32:- और हमने अपनी (कुदरत से) आसमान को एक छत (की तरह) बनाया जो महफूज (सदा रहने वाला) है और ये लोग इस (आसमान के अंदर) की (मौजूदा) निशानियों से मुँह मोड़े हुए हैं।