अध्याय 13 श्लोक 32
यथा, सर्वगतम्, सौक्ष्म्यात्, आकाशम्, न, उपलिप्यते।
सर्वत्र, अवस्थितः, देहे, तथा, आत्मा, न, उपलिप्यते ।।32।।
अनुवाद: (यथा) जिस प्रकार (सर्वगतम्) सर्वत्र व्याप्त (आकाशम्) आकाश (सौक्ष्म्यात्) सूक्ष्म होने के कारण (न, उपलिप्यते) लिप्त नहीं होता (तथा) वैसे ही (देहे) देहमें घड़े में सूर्य सदृश (सर्वत्र) सर्वत्र (अवस्थितः) स्थित (आत्मा) आत्मा सहित परमात्मा देहके गुणोंसे (न,उपलिप्यते) लिप्त नहीं होता। (32)
हिन्दी: जिस प्रकार सर्वत्र व्याप्त आकाश सूक्ष्म होने के कारण लिप्त नहीं होता वैसे ही देहमें घड़े में सूर्य सदृश सर्वत्र स्थित आत्मा सहित परमात्मा देहके गुणोंसे लिप्त नहीं होता।