अध्याय 3 श्लोक 30
मयि, सर्वाणि, कर्माणि, संन्यस्य, अध्यात्मचेतसा,
निराशीः, निर्ममः, भूत्वा, युध्यस्व, विगतज्वरः ।।30।।
अनुवाद: (अध्यात्मचेतसा) पूर्ण परमात्मामें लगे हुए चितद्वारा (सर्वाणि) सम्पूर्ण (कर्माणि) कर्मोंको (मयि) मुझमें (संन्यस्य) त्याग करके (निराशीः) आशारहित (निर्ममः) ममतारहित और (विगतज्वरः) संतापरहित (भूत्वा) होकर (युध्यस्व) युद्ध कर। इसी का प्रमाण गीता अध्याय 18 श्लोक 66 में है कि मेरी सर्व धार्मिक पूजाओं को मुझमें छोड़ कर सर्व शक्तिमान परमेश्वर की शरण में जा। (30)
हिन्दी: पूर्ण परमात्मामें लगे हुए चितद्वारा सम्पूर्ण कर्मोंको मुझमें त्याग करके आशारहित ममतारहित और संतापरहित होकर युद्ध कर। इसी का प्रमाण गीता अध्याय 18 श्लोक 66 में है कि मेरी सर्व धार्मिक पूजाओं को मुझमें छोड़ कर सर्व शक्तिमान परमेश्वर की शरण में जा।