अध्याय 3 श्लोक 27
प्रकृतेः, क्रियमाणानि, गुणैः, कर्माणि, सर्वशः,
अहंकारविमूढात्मा, कर्ता, अहम्, इति, मन्यते ।।27।।
अनुवाद: (कर्माणि) सम्पूर्ण कर्म (सर्वशः) सब प्रकारसे (प्रकृतेः) प्रकृति दुर्गा से उत्पन्न (गुणैः) रजगुण ब्रह्मा, सतगुण विष्णु, तमगुण शिव जी अर्थात् तीनों गुणोंद्वारा (क्रियमाणानि) संस्कार वश किये जाते हैं तो भी (अहंकार विमूढात्मा) अहंकार युक्त शिक्षित होते हुए तत्वज्ञान हीन अज्ञानी (अहम्,कर्ता) ‘मैं कत्र्ता हूँ‘ (इति) ऐसा (मन्यते) मानता है। (27)
हिन्दी: सम्पूर्ण कर्म सब प्रकारसे प्रकृति दुर्गा से उत्पन्न रजगुण ब्रह्मा, सतगुण विष्णु, तमगुण शिव जी अर्थात् तीनों गुणोंद्वारा संस्कार वश किये जाते हैं तो भी अहंकार युक्त शिक्षित होते हुए तत्वज्ञान हीन अज्ञानी ‘मैं कत्र्ता हूँ‘ ऐसा मानता है।