अध्याय 3 श्लोक 37
(भगवान उवाच)
कामः, एषः, क्रोधः, एषः, रजोगुणसमुद्भवः,
महाशनः, महापाप्मा, विद्धि, एनम्, इह, वैरिणम् ।।37।।
अनुवाद: (रजोगुणसमुद्भवः) रजोगुणसे उत्पन्न हुआ (एष) यह (कामः) विषय वासना अर्थात् सैक्स और (एष) यह (क्रोधः) क्रोध (महाशनः) जीव को अत्यधिक खाने वाला अर्थात् नष्ट करने वाला (महापाप्मा) बड़ा पापी है (एनम्) इस उपरोक्त पाप को ही तू (इह) इस विषयमें (वैरिणम्) वैरी (विद्धि) जान। (37)
हिन्दी: रजोगुणसे उत्पन्न हुआ यह विषय वासना अर्थात् सैक्स और यह क्रोध जीव को अत्यधिक खाने वाला अर्थात् नष्ट करने वाला बड़ा पापी है इस उपरोक्त पाप को ही तू इस विषयमें वैरी जान।