भगवान शिव के पिता का रहस्य
शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव के पिता का रहस्य
हिंदू धर्म में सामान्यतः श्री ब्रह्मा, श्री विष्णु और श्री शिव को सर्वोच्च एवं अनादि माना जाता है, किंतु जब शास्त्रों का गहन अध्ययन किया जाता है, तो एक भिन्न और स्पष्ट सत्य सामने आता है। शिव पुराण तथा देवी पुराण जैसे प्रमाणिक ग्रंथ यह बताते हैं कि ब्रह्मा, विष्णु और शिव — तीनों के माता-पिता हैं और ये तीनों गुणों के अधीन होकर सृष्टि में कार्य करते हैं।
त्रिदेव के गुण, माता और पिता
शास्त्रों के अनुसार:
- श्री ब्रह्मा रजगुण से युक्त हैं
- श्री विष्णु सतगुण से युक्त हैं
- श्री शिव तमगुण से युक्त हैं
इन तीनों की माता देवी दुर्गा (प्रकृति देवी) हैं तथा पिता काल ज्योति निरंजन हैं, जिसे शास्त्रों में सदाशिव या काल ब्रह्म भी कहा गया है।
शिव महापुराण का प्रमाण (रुद्र संहिता)
गीता प्रेस, गोरखपुर से प्रकाशित शिव महापुराण के रुद्र संहिता खंड में अध्याय 5 से 9 तक इस विषय का विस्तृत वर्णन मिलता है। इस प्रसंग में देवर्षि नारद के प्रश्न के उत्तर में स्वयं श्री ब्रह्मा सृष्टि की उत्पत्ति का रहस्य बताते हैं।
श्री ब्रह्मा कहते हैं कि प्रारंभ में केवल एक ही सत्ता विद्यमान थी, जिसे "सद्ब्रह्म" कहा गया है। उस समय सर्वत्र प्रलय की स्थिति थी। वही निराकार परम सत्ता बाद में शिव के समान स्वरूप धारण करती है, जिसे सदाशिव कहा गया।
दुर्गा (शिवा) की उत्पत्ति
सदाशिव ने अपने शरीर से एक स्त्री स्वरूप को उत्पन्न किया। वह स्त्री दुर्गा, जगदम्बिका, प्रकृति देवी तथा त्रिदेवों की जननी कहलाई। उनके आठ भुजाएँ बताई गई हैं और उन्हें शिवा भी कहा गया है।
यहीं से सृष्टि के विस्तार की प्रक्रिया आरंभ होती है।
श्री विष्णु की उत्पत्ति
शिव पुराण के अनुसार सदाशिव (काल ब्रह्म) और शिवा (दुर्गा) पति-पत्नी रूप में रहते हुए एक पुत्र को उत्पन्न करते हैं, जिसका नाम विष्णु रखा गया। इस प्रकार श्री विष्णु की उत्पत्ति शिव और दुर्गा के संयोग से मानी गई है।
श्री ब्रह्मा की उत्पत्ति
इसी क्रम में श्री ब्रह्मा स्वयं स्वीकार करते हैं कि जिस प्रकार विष्णु की उत्पत्ति शिव और शिवा के संयोग से हुई, उसी प्रकार मेरी (ब्रह्मा की) उत्पत्ति भी शिव और शिवा से हुई है।
यह स्वीकारोक्ति अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह स्पष्ट करती है कि ब्रह्मा और विष्णु दोनों ही जन्मवान हैं।
शिव पुराण (गीता प्रेस, गोरखपुर)





भगवान शिव की उत्पत्ति पर स्पष्टीकरण
यहां यह समझना आवश्यक है कि शिव पुराण की रुद्र संहिता में शंकर जी की उत्पत्ति का प्रकरण नहीं दिया गया है। कई अनुवादों में शिव और शंकर को एक मान लेने के कारण भ्रम उत्पन्न हुआ है, जो अनुवादकर्ता की त्रुटि है।
वास्तव में:
- यहाँ शिव का अर्थ काल ब्रह्म (ज्योति निरंजन) से है
- शिवा का अर्थ दुर्गा (प्रकृति देवी) से है
देवी पुराण में स्वयं शंकर जी यह स्वीकार करते हैं कि उनका जन्म दुर्गा (प्रकृति) से हुआ है। अतः शंकर जी भी जन्म-मरण के अधीन हैं।
निष्कर्ष
शिव पुराण और देवी पुराण के संयुक्त प्रमाणों से यह सिद्ध होता है कि:
- ब्रह्मा, विष्णु और शिव तीनों गुणों के अधीन हैं
- तीनों के माता दुर्गा देवी हैं
- तीनों के पिता काल ज्योति निरंजन (काल ब्रह्म) हैं
- ये तीनों नश्वर हैं और सृष्टि के शाश्वत, अविनाशी परमेश्वर नहीं हैं
अतः भगवान शिव अत्यंत पूज्य और शक्तिशाली देवता अवश्य हैं, किंतु वे सर्वोच्च, अजन्मा परमात्मा नहीं हैं। सच्चे परमेश्वर की पहचान शास्त्रों के पूर्ण और समन्वित ज्ञान से ही संभव है, न कि केवल लोकप्रचलित मान्यताओं से।