अध्याय 9 श्लोक 28

शुभाशुभफलैः, एवम्, मोक्ष्यसे, कर्मबन्धनैः,
सóयासयोगयुक्तात्मा, विमुक्तः, माम्, उपैष्यसि।।28।।

अनुवाद: (एवम्) इस प्रकार मतानुसार साधना करने (सóयासयोगयुक्तात्मा) घर त्याग कर या हठ योग करके साधना करने वाले साधक (शुभाशुभफलैः) अपने हित व अहित के फल को जान कर (कर्मबन्धनैः) शास्त्र विधि रहित साधना जो हठयोग एक स्थान पर बन्ध कर बैठने से (मोक्ष्यसे) मुक्त हो जाएगा। ऐसे (विमुक्तः) शास्त्र विरुद्ध साधना के बन्धन से मुक्त होकर अर्थात् शास्त्र विधि अनुसार साधना करके (माम्) मुझसे ही (उपैष्यसि) लाभ प्राप्त करेगा। अर्थात् मेरे पास ही आएगा। (28)

हिन्दी: इस प्रकार मतानुसार साधना करने घर त्याग कर या हठ योग करके साधना करने वाले साधक अपने हित व अहित के फल को जान कर शास्त्र विधि रहित साधना जो हठयोग एक स्थान पर बन्ध कर बैठने से मुक्त हो जाएगा। ऐसे शास्त्र विरुद्ध साधना के बन्धन से मुक्त होकर अर्थात् शास्त्र विधि अनुसार साधना करके मुझसे ही लाभ प्राप्त करेगा। अर्थात् मेरे पास ही आएगा।