गीता अध्याय श्लोक 53
अहंकारम्, बलम्, दर्पम्, कामम्, क्रोधम्, परिग्रहम्,
विमुच्य निर्ममः, शान्तः, ब्रह्मभूयाय, कल्पते ।।53।।
अनुवाद: (अहंकारम्) अहंकार (बलम्) शक्ति (दर्पम्) घमण्ड (कामम्) काम अर्थात् विलास (क्रोधम्) क्रोध (परिग्रहम्) परिग्रह अर्थात् आवश्यकता से अधिक संग्रह का (विमुच्य) त्याग करके (निर्ममः) ममता रहित (शान्तः) शान्त साधक (ब्रह्मभूयाय) पूर्ण परमात्मा को प्राप्त होने का (कल्पते) पात्र होता है। (53)
हिन्दी: अहंकार शक्ति घमण्ड काम अर्थात् विलास क्रोध परिग्रह अर्थात् आवश्यकता से अधिक संग्रह का त्याग करके ममता रहित शान्त साधक पूर्ण परमात्मा को प्राप्त होने का पात्र होता है।