अध्याय 10 श्लोक 9

मच्चित्ताः, म०तप्राणाः, बोधयन्तः, परस्परम्,
कथयन्तः, च, माम्, नित्यम्, तुष्यन्ति, च, रमन्ति, च ।।9।।

अनुवाद: (म०तप्राणाः) मेरे पर आधारित प्राणी (बोधयन्तः) इसीको जानने वाले (च) और (मच्चित्ताः) मेरे में लीन मन वाले (परस्परम्) आपसमें (कथयन्तः) विचार विमर्श करते हुए (च) और (नित्यम्) नित्य (तुष्यन्ति) संतुष्ट होते हैं (च) तथा (माम्) मुझमें (रमन्ति) लीन रहते हैं। (9)

हिन्दी: मेरे पर आधारित प्राणी इसीको जानने वाले और मेरे में लीन मन वाले आपसमें विचार विमर्श करते हुए और नित्य संतुष्ट होते हैं तथा मुझमें लीन रहते हैं।