अध्याय 18 श्लोक 1

(अर्जुन उवाच)

सन्न्यासस्य, महाबाहो, तत्त्वम्, इच्छामि, वेदितुम्,
त्यागस्य, च, हृषीकेश, पृथक्, केशिनिषूदन।।1।।

अनुवाद: (महाबाहो) हे महाबाहो! (हृषीकेश) हे अन्तर्यामिन! (केशिनिषूदन) केशिनाशक (सन्न्यासस्य) संन्यास (च) और (त्यागस्य) त्यागके (तत्त्वम्) तत्वको (पृथक्) पृथक्-पृथक् (वेदितुम्) जानना (इच्छामि) चाहता हूँ। (1)

हिन्दी: हे महाबाहो! हे अन्तर्यामिन! केशिनाशक संन्यास और त्यागके तत्वको पृथक्-पृथक् जानना चाहता हूँ।