सूरः अल् बकरा-2

सूरः अल् बकरा-2 आयत नं. 188:- और तुम लोग न तो आपस में एक-दूसरे का माल अवैध रूप से खाओ और अधिकारियों (आफिसरों) के आगे उनको इस गरज से पेश न करो कि तुम्हें दूसरों के माल का कोई हिस्सा जान-बूझकर अन्यायपूर्ण तरीके से खाने का अवसर मिल जाए। {अर्थात् आफिसरों (अधिकारियों) को रिश्वत देकर अनुचित लाभ न उठाओ।}

सूरः अल् बकरा-2 आयत नं. 268:- शैतान (काल का दूत तुम्हारे कर्म खराब करने के लिए) तुम्हें निर्धनता से डराता है और शर्मनाक नीति अपनाने के लिए उकसाता है, मगर अल्लाह तुम्हें अपनी बखशीश और उदार कृपा से उम्मीद दिलाता है। अल्लाह बड़ी समाई वाला और सर्वज्ञ है।

सूरः अल् बकरा-2 आयत नं. 269:- अल्लाह जिसको चाहता है, हिकमत (तत्त्वज्ञान) प्रदान करता है और जिसे हिकमत (तत्त्वज्ञान) मिली, उसे वास्तव बड़ी दौलत मिल गई।

सूरः अल् बकरा-2 आयत नं. 256:- धर्म के विषय में कोई जोर-जबरदस्ती नहीं।

नशा तथा जूआ निषेध

सूरः अल् बकरा-2 आयत नं. 219:- शराब तथा जूए में बड़ी खराबी है, महापाप है।

ब्याज लेना पाप है

सूरः अल् बकरा-2 आयत नं. 276:- अल्लाह ब्याज लेने वाले का मठ मार देता है यानि नाश कर देता है और (खैरात) दान करने वाले को बढ़ाता है। और अल्लाह किसी नाशुक्रे बुरे अमल वाले इंसान को पसंद नहीं करता।

सूरः अल् बकरा-2 आयत नं. 277:- हाँ, जो लोग इमान लाए हैं और अच्छे कर्म करें और नमाज कायम करें और (जकात) दान दें, उनका बदला बेशक उनके रब के पास है। उनके लिए किसी खौप (भय) और रंज (शोक) का मौका नहीं है।

सूरः अल् बकरा-2 आयत नं. 278:- ऐ लोगो जो इमान लाए हो। अल्लाह से डरो और जो कुछ तुम्हारा ब्याज लोगों पर बाकी रह गया है, उसे छोड़ दो। अगर वास्तव में तुम इमान लाए हो।

सूरः अल् बकरा-2 आयत नं. 279:- अगर तुमने ऐसा नहीं किया तो सावधान हो जाओ कि अल्लाह और उसके रसूल (संदेशवाहक) की ओर से तुम्हारे खिलाफ युद्ध की घोषणा है यानि सख्त दंड दिया जाएगा।

सूरः अल् बकरा-2 आयत नं. 280:- तुम्हारा कर्जदार तंगी में हो तो हाथ खुलने तक उसे मुहलत (छूट) दे दो और अगर दान कर दो तो यह तुम्हारे लिए अधिक अच्छा है अगर तुम समझो।

(जकात) दान करना चाहिए

सूरः अल् बकरा-2 आयत नं. 261:- जो लोग अपना माल (धन) अल्लाह के मार्ग में खर्च करते हैं, उनके खर्च की मिसाल ऐसी है जैसे एक दाना बोया जाए। उससे सात बालें निकलें और हर बाल में सौ दाने हों। इस तरह अल्लाह जिसके कर्म को चाहता है, बढ़ोतरी प्रदान करता है। वह समाई वाला भी है और सर्वज्ञ भी।

सूरः अल् बकरा-2 आयत नं. 262:- जो लोग अपना माल (धन) अल्लाह के मार्ग में खर्च करते हैं और खर्च करके फिर अहसान नहीं जताते, न दुःख देते हैं। उनका बदला उनके रब के पास है और उनके लिए किसी रंज (चिंता) तथा खौप (भय) का मौका नहीं। (यानि उनको कोई चिंता तथा भय की आवश्यकता नहीं है। परमात्मा उनकी रक्षा करता है। धन वृद्धि भी करता है।)