अध्याय 12 श्लोक 18

समः, शत्रौ, च, मित्रो, च, तथा, मानापमानयोः,
शीतोष्णसुखदुःखेषु, समः, संगविवर्जितः ।।18।।

अनुवाद: (शत्रौ, मित्रो) शत्रु-मित्रमें (च) और (मानापमानयोः) मान-अपमानमें (समः) सम है (तथा) तथा (शीतोष्णसुखदुःखेषु) सर्दी गर्मी और सुख-दुःखादि द्वन्द्वोंमें (समः) सम है (च) और (संगविवर्जितः) आसक्तिसे रहित है। (18)

हिन्दी: शत्रु-मित्रमें और मान-अपमानमें सम है तथा सर्दी गर्मी और सुख-दुःखादि द्वन्द्वोंमें सम है और आसक्तिसे रहित है।