अध्याय 4 श्लोक 3
सः, एव, अयम्, मया, ते, अद्य, योगः, प्रोक्तः, पुरातनः,
भक्तः, असि, मे, सखा, च, इति, रहस्यम्, हि, एतत्, उत्तमम् ।।3।।
अनुवाद: तू (मे) मेरा (भक्तः) भक्त (च) और (सखा) सखा (असि) है (इति) इसलिये (सः) वही (अयम्) यह (पुरातनः) पुरातन (एव) वास्तविक (योगः) भक्ति मार्ग (अद्य) पुराना (मया) मैंने (ते) तुझको (प्रोक्तः) कहा है (हि) क्योंकि (एतत्) यह (उत्तमम्) बड़ा ही उत्तम (रहस्यम्) रहस्य वाला है अर्थात् गुप्त रखने योग्य विषय है। (3)
हिन्दी: तू मेरा भक्त और सखा है इसलिये वही यह पुरातन वास्तविक भक्ति मार्ग पुराना मैंने तुझको कहा है क्योंकि यह बड़ा ही उत्तम रहस्य वाला है अर्थात् गुप्त रखने योग्य विषय है।